भुलायें नहीं भूल सकती

वो पन्द्रह मिन की ब्रेक में भाग के कैन्टीन जाना,
वो अन्ना अन्ना चिल्ला के चाय का प्याला मान्गना,
वो चेन्नै कि खड़ी दुपहरिया में पुरुशोत्तम तक चल के जाना,
वो नाक मुँह सिकोड़ते हुए सेमिनार हाल का ए.सी. ठीक करना,
वो नीन्द से भरी आन्खें लिये, रोते गाते क्लास मे घुसना,
वो उल्लू की तरह रात भर जागना और फ़िर उस बहाने से दिन भर सोना,
वो खाना खाने की लाइन में रोज़ लगना,
वो को-को को रोज़ गालियों का तोहफ़ा देना,
वो हर बर्थडे पे केक मुँह पे मलना और फ़िर लालू को पीटना,
वो रात को दोस्तों का घर तक छोड़ के आना,
वो रिसेप्शन में बैठ के रात के दो बजे गाना गुनगुनाना,
वो इम्तिहानों के पेहले लाइट का चले जाना, फ़िर मोम्बत्ती की रोशनी मे पढाई करना,
वो रोक्की के डर से उसकी क्लास मे थर्राना,
वो हर एक क्लास मे गायत्री और नागू का सो जाना,
वो जिम मे कैरम खेलना, फ़िर गोटियाँ घुमा देना,
वो दिन के चौबीस घन्टों मे से अट्ठारह घन्टे कौलेज मे बैठना,
वो टूटी फ़ूटी तमिल मे बात करना, फ़िर वसू की हिन्दी सुधारना,
वो वसू का मैडम जी मैडम जी चिल्ला चिल्ला के बुलाना
वो गायत्री और रूपल का रोज़ क्लास के लिये मुझे जगाना,
वो भाई-भाई चिल्ला चिल्लाके मानिक को ढून्ढना,
वो रोज़ अड्यार जाते वक्त औटो वाले से पराग का बहस करना,
वो डान्स करते वक्त गुस्से मे भी मुस्कुराते नितिन को देखना,
वो सिताश्व को जौन बुलाना, फ़िर कभी बिपाशा तो कभी रोशनी के साथ चिढाना
वो एम्पिरिकल स्टडी के चक्कर मे हर आने जाने वाले से प्रश्नोत्तरी भरवाना,

वो ठहाके, वो किलकारियाँ,
वो लोग, वो उनकी अनगिनत बातें,

भुलायें नहीं भूल सकती
वो ग्रेट लेक्स मे सन्जोयी यादें