परेशान हैं लोग क्यूँ हमारे इस अफ़साने से
कहते हैं हर लफ़्ज़ में एक दर्द रहता है
कहते हैं हम वो लफ़्ज़ नही लहू है मेरा
क्यूँकि जिस्म में लहू नही तेरा दर्द बहता है

पाने से खोने का मज़ा कुछ और है
बन्द आन्खों मे रोने का मज़ा कुछ् और है
आँसूं बने लफ़्ज़, लफ़्ज़ बनी गज़ल
और उस गज़ल मे तेरे होने का मज़ा कुछ और है

तसल्ली नही होती है तेरी तसव्वुर् और तस्वीर से
तक़ाज़ा क्या किया जाये तक़्दीर से
मेरा चाँद, मेरी चाँदनी, मेरी चाँदी है तुझसे
ऐ मेरे चश्मो-चिराग, अब् तो मेरी चाह और चैन है तुझसे

हर वक़्त गुल बनकर मुस्कुराना ज़िन्दगी है
मुस्कुरा कर ग़म भुलाना ज़िन्दगी है
जीत कर मुस्कुराये तो क्या मुस्कुराये
हार कर मुस्कुराना ज़िन्दगी है