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Book Review: Gunahon ka Devta (गुनाहों का देवता) by Dharmvir Bharti (धर्मवीर भारती) — November 10, 2009

Book Review: Gunahon ka Devta (गुनाहों का देवता) by Dharmvir Bharti (धर्मवीर भारती)

हिंदी के उपन्यास पढने का हमेशा से मुझे बहुत शौक था. ये शौक मैंने विरासत में अपनी माँ से लिया है, जो कि स्वयं हिंदी के उपन्यास किताबी कीडों कि तरह चाट डालती थीं. परन्तु हिंदी के उपन्यास ढूंढ पाना बहुत कष्टदायक कार्य है… माँ ने कभी किताबें खरीदी ही नहीं थीं, वे लाइब्रेरी से किताबें ला ला के पढ़तीं और उन्हें लौटा देती थीं. इस कारणवश किताबों का कभी संग्रह न हो सका. जैसे तैसे मैंने मुंशी प्रेमचंद की “निर्मला” पढ़ी थी और आनंद से प्रफुल्लित हो उठी थी! परन्तु उसके बाद से कोई अवसर ही न मिल सका! लेकिन इश्वर के आगे कहीं कुछ रुक पाया है? कुछ ही दिनों पहले मुझे एक ऐसा ही सुनहरा अवसर मिल गया… ऐसा जिसकी मुझे हमेशा से तलाश थी… लैंडमार्क में हिंदी किताबों का ढेर लगा था जिसे मैं उठा लायी! अब एक एक कर के मैं वो सारी किताबें पढूंगी, जो पहले न पढ़ सकी थी.

इनमे से सब से ऊपर थी श्री धर्मवीर भारती की “गुनाहों का देवता“. इस उपन्यास के बारे में मैंने माँ से बहुत सुना था. वे हमेशा मुझे कहती थीं, कि कभी ये पुस्तक हाथ लगे तो पढना ज़रूर! आपकी जानकारी के लिए बता दूँ, ये उपन्यास हिंदी के सभी उपन्यासों में से १० सर्वश्रेष्ठ उपन्यासों में माना जाता है! इस उपन्यास पर एक फिल्म भी बनी थी, परन्तु वो रिलीज़ न हो सकी! उस फिम में रेखा और अमिताभ बच्चन प्रमुख भूमिका में थे! सो हाथ लग गयी और मैंने पढ़ डाली! सच बात तो ये है कि इस उपन्यास में एक अजब सा नशा है. आप जितना भी चाहें, एक बार उठाने के बाद इसे रख न सकेंगे. न तो ये कोई थ्रिलर है और ना ही कोई रोमांचक कथा. ये एक साधारण सी कहानी है – चंदर और सुधा की.. उनके प्यार, उनके बलिदान की… और तो और, यह महज एक काल्पनिक कथा नहीं, बल्कि इलाहबाद युनिवेर्सिटी के एक रिसर्च स्कॉलर की वास्तविक कहानी है!

एक तरफ चंदर, दूसरी ओर सुधा! उन दोनों के अद्वितीय रिश्ते को श्री भारती जी ने इस बखूबी से दर्शाया है, कि आपको मालूम पड़ेगा कि जैसे ये पात्र आपके चारों ओर मंडरा रहे हों! उन के मन कि उलझनें, अपने मन कि उलझनें लगने लगती हैं! उनके सुख, दुःख, उनकी कठिनायों को हम अपना बना बैठते हैं! और इस कहानी के अंत तक हम में एक छोटी सी झीनी सी आस रहती है कि काश! काश! ऐसा न होता!

खैर! इस कहानी के बारे में जितना भी कहा या लिखा जाये, कम हैं! अगर आप हिंदी भाषा के ज्ञाता हैं, तो ये उपन्यास ज़रूर पढें! आपको निराशा नहीं होगी!

English translation:

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